न.नि. फर्जी बिल घोटाले में ED की कार्यवाही
ED के अनुसार यह जांच इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी मेजरमेंट बुक, झूठे कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर नगर निगम के खजाने से 103.42 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि कई ऐसे कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया जो या तो कभी हुए ही नहीं या पहले ही पूरे किए जा चुके थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड में बदलाव कर भुगतान जारी कराया गया।
अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत
ED का आरोप है कि ठेकेदार फर्मों ने नगर निगम और ऑडिट कार्यालय के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी फाइलें तैयार कीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये के भुगतान स्वीकृत कराए गए। जांच में यह भी सामने आया कि निकाली गई राशि को नकद बांटा गया, विभिन्न खातों और संस्थाओं के जरिए घुमाया गया तथा बाद में चल-अचल संपत्तियां खरीदने और निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया।
20 ठिकानों पर छापे
जांच के दौरान ED ने 5 और 6 अगस्त 2024 को 20 स्थानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में करीब 22.04 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, डीमैट होल्डिंग और म्यूचुअल फंड सहित अन्य संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गईं। साथ ही बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए।
करोडो रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त
इसके बाद ED ने दो अलग-अलग आदेशों के जरिए 52 अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत करीब 37.14 करोड़ रुपये है, अस्थायी रूप से अटैच कीं। इनमें व्यावसायिक संपत्तियां, मकान, प्लॉट और कृषि भूमि शामिल हैं। अब तक इस मामले में 59.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं।
तीन आरोपी पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में ED पहले ही कथित मास्टरमाइंड अभय सिंह राठौर के अलावा मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी का आरोप है कि इनकी भूमिका कथित तौर पर पूरे नेटवर्क को संचालित करने और अवैध धन को ठिकाने लगाने में अहम रही।
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