नटराजन का नामांकन निरस्त,
यानि लोकतंत्र की हत्या
डेस्क रिपोर्ट। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा सत्ता के अहंकार में इस कदर चूर हो चुकी है कि अब उसे लोकतंत्र, संविधान और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की कोई परवाह नहीं रह गई है।
राजनीतिक मुकाबले में हार का डर इतना बढ़ गया है कि विपक्ष को मैदान से बाहर करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह केवल मीनाक्षी नटराजन का अपमान नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का अपमान है जो संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। भाजपा लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने के बजाय प्रशासनिक ताकत के बल पर विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम कर रही है।
देश की जनता सब देख रही है। लोकतंत्र को कमजोर करने और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने की हर कोशिश का जवाब जनता समय आने पर देगी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करती रही है और आगे भी हर अलोकतांत्रिक कदम का डटकर विरोध करेगी। लोकतंत्र किसी पार्टी की जागीर नहीं है, यह जनता की ताकत है — और जनता ही इसका जवाब देगी।
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