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संसद पर युवाओं का हल्लाबोल....

संसद पर युवाओं का हल्लाबोल....

                  चलो संसद मार्च पर
        युवाओं ने दिखाई अपनी ताकत
दिल्ली। के जंतर-मंतर पर सोमवार सुबह से भारी भीड़ जुट गई। कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' आह्वान पर बड़ी संख्या में संसद की ओर रुख किया। इस दौरान सपा सांसद और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी शामिल हुईं। उन्होंने दिल्ली पुलिस और भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

                             

आज लोकतंत्र के इतिहास में ये काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पुलिस के आंखों में भी शर्मिंदगी दिख रही थी। कुछ पुलिसकर्मी गुंडे बने हुए थे। कुछ पुलिसवाले बिना वर्दी के आए और बच्चों को मारा है। बच्चों को करंट दिया। जहां नियम होता है कि आपको पैरों पर मारना है, वहां बच्चों के सीने पर मारा है, ये आघात भारत माता के सीने पर किया है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री को हटाएं, सरकार जिम्मेदारी ले। इतनी अहंकारी कठोर और निर्दयी सरकार शायद ही देश के इतिहास ने देखी हो।

           वांगचुक का अनशन जारी

सफदरजंग हॉस्पिटल से सोनम वांगचुक ने हाथ से लिखे संदेश में कहा- मैं तब तक अनशन जारी रखूंगा, जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती, या फिर मुझे यहां अस्पताल में ही सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से CJP के सौरभ दास और आशुतोष रांका की करीब 2 घंटे बैठक चली। इसमें 3 मांगें रखीं गईं।

1. सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई

2. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या उन्हें कैबिनेट से हटाना

3. NEET से जुड़ी हर मौत के लिए ₹1 करोड़ मुआवजा

  एक महीने पहले शुरू किया था प्रदर्शन

नीट पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे व शिक्षा व्यवस्था में सुधार समेत कई मांगों को लेकर सीजेपी ने एक महीने पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 दिन पहले भूख हड़ताल शुरू कर दी और 20 जुलाई को उन्होंने संसद मार्च का आह्वान किया, जिसमें लोगों से जंतर-मंतर पहुंचकर देश की संसद तक पैदल मार्च करने की अपील की थी, क्योंकि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा था।

   रणनीति विफल करने में जुटी रही पुलिस

20 जुलाई को संसद मार्च में पूरी ताकत झोंकने की रणनीति के तहत देशभर से लोगों के पहुंचने का आह्वान किया गया. लेकिन प्रशासन व पुलिस ने इस प्रदर्शन को नाकाम करने के लिए पहले से ही एक मजबूत रणनीति तैयार की थी. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि कैसे इस संसद मार्च की रणनीति को विफल करने के लिए प्रशासनिक तंत्र ने जमीन से लेकर डिजिटल स्पेस तक घेराबंदी की।

                  पुलिस की घेराबंदी 

20 जुलाई की सुबह से ही देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा, छात्र व समर्थक ट्रेन, निजी बसों और सार्वजनिक परिवहन के जरिए दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए थे. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से लोग जंतर-मंतर पर पहुंचने लगे. युवाओं का एक ही मकसद था - जंतर-मंतर पर एकत्र होकर सीधे संसद भवन की ओर रुख करना।





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