जिले में गंभीर जल संकट का संकेत, जवाबदार..??
जिले में गंभीर जल संकट का संकेत
जवाबदार ...??
डेस्क रिपोर्ट । जिले में औसत से कम बारिश, भूजल स्तर पर बढ़ता दबाव और पेयजल व्यवस्था को लेकर सामने आ रही चुनौतियां आने वाले समय में गंभीर जल संकट का संकेत दे रही हैं। प्रदेश के 12 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, उसमें रतलाम जिला भी है।
समय रहते भूजल संरक्षण और जल स्रोतों के नियमन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस बार रतलाम शहर और आसपास के क्षेत्रों के सामने स्थिति और कठिन हो सकती है। सवाल यह है कि संभावित संकट को देखते हुए जिला प्रशासन अभी से सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा है?
इंदौर जिले में कम वर्षा और भूजल स्रोतों के अत्यधिक दोहन को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस कदम का उद्देश्य गिरते जलस्तर को देखते हुए आगामी समय में पेयजल संकट की आशंका को कम करना है। इंदौर प्रशासन ने संभावित समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। ऐसे में रतलाम में भी यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यहां प्रशासन जल संकट गहराने का इंतजार कर रहा है?
जिले में इस वर्ष औसत से कम बारिश होने की स्थिति में भूजल का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। बारिश कम होने से जल स्रोतों के पुनर्भरण पर असर पड़ सकता है, जबकि लगातार बोरिंग और मोटरों के जरिए पानी निकालने से भूजल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे हालात में प्रशासन को जिले की वास्तविक स्थिति का आकलन कर यह तय करना चाहिए कि किन क्षेत्रों में निजी बोरिंग पर नियंत्रण, नए नलकूप खनन पर रोक अथवा अन्य प्रतिबंधात्मक कदम जरूरी हैं। पूरे शहर में रोज सुबह लोगो को पानी बहाते हुवे देखा जा सकता हे।
यदि अभी से जल स्रोतों की निगरानी नहीं की गई, तो गर्मी के दिनों में पेयजल की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, किसानों और ग्रामीण आबादी पर पड़ेगा।
यह किसी किसान के खेती करने के अधिकार का विरोध नहीं, बल्कि पेयजल और सिंचाई के बीच संतुलन कायम करने का सवाल है। यदि भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, तो वैज्ञानिक आकलन के आधार पर सभी संबंधित पक्षों के लिए उचित नियम बनाना जरूरी है। पेयजल के लिए उपयोगी जल स्रोतों को सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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