पीलियाखाल सौंदर्यीकरण, लापरवाही की ...??
पीलियाखाल सौंदर्यीकरण की जमीनी हकीकत
डेस्क रिपोर्ट। जावरा शहर में पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना की ज़मीनी हकीकत काफी चिंताजनक और अधूरी है। जवाबदारों की लापरवाही की वजह से वर्ष 2019 में स्वीकृत हुई इस महत्वाकांक्षी योजना आज तक अधूरी हे।
बजट और स्वीकृति
जावरा शहर के बीच से बहने वाले नाले (पीलियाखाल) को साफ़ और सुंदर बनाने के लिए वर्ष 2019 में ₹8 करोड़ 68 लाख 89 हजार की योजना स्वीकृत की गई थी।
काम की सुस्त रफ़्तार
योजना की स्वीकृति के सालों बाद भी पीलियाखाल सौंदर्यीकरण का काम आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। कागज़ों और दावों के विपरीत ज़मीन पर विकास कार्य अटके हुए हैं।
मौजूदा स्थिति
शहर के बीचों-बीच बहने वाली इस पीलियाखाल में सालों से गंदा और दूषित पानी जमा है, इस खाल के एक किनारे पर मंदिर ओर दूसरे किनारे पर मस्जिद हे, ओर स्थानीय निवासियों को बदबू, मच्छरों और बीमारियों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। आसपास के क्षेत्रों के हैंड पंप ओर ट्यूबवेल में भी गंदे पानी की शिकायत आती रही हे।
भुगतान पर सवाल
स्थानीय स्तर और पूर्व अध्यक्ष द्वारा यह मुद्दा लगातार उठता रहा है कि काम पूरी तरह से पूरा न होने के बावजूद भी ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर भुगतान किया जा चुका है, जो प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। संक्षेप में कहें तो, शहर को स्वस्थ और सुंदर बनाने का जो सपना इस योजना के ज़रिए दिखाया गया था, वह प्रशासन और ठेकेदारों की उदासीनता के कारण फ़िलहाल सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित नज़र आ रहा है। जवाबदारों की लापरवाही साफ दिखाई दे रही हे।
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