जुलूस में शामिल पार्षद की मौत
जानकारी के अनुसार, ईद-ए-मिलादुन्नबी का जुलूस पैलेस रोड से होते हुए शेरानी पुरा की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान जुलूस में शामिल वरिष्ठ पार्षद नासिर कुरैशी को अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन और आसपास मौजूद लोग उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जुलूस में मौजूद लोगों द्वारा यह जानकारी सामने आई हे कि जुलूस में बड़े-बड़े साउंड सिस्टम और डीजे काफी तेज आवाज में बज रहे थे। आवाज का प्रभाव इतना तीव्र था कि आसपास की सड़कों और इमारतों में कंपन महसूस किया जा रहा था। जुलूस में शामिल कई बच्चों ओर लोगो को अपने कानों में उंगलियां डालकर चलते हुवे देखा गया।
भारत में कानून और ध्वनि प्रदूषण नियमों (Noise Pollution Rules, 2000) के अनुसार, डीजे (DJ) या किसी भी लाउडस्पीकर की आवाज रिहायशी इलाको में 55db से ज्यादा नहीं होना चाहिए होनी चाहिए। यह सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस इलाके में और किस समय डीजे बजा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, मानव कानों के लिए 85 dB से अधिक की आवाज लगातार सुनना नुकसानदेह हो सकता है। शादियों या पार्टियों में बजने वाले डीजे अक्सर 100 से 110 dB तक पहुंच जाते हैं, जो कानूनी रूप से गलत है और बहरेपन का कारण बन सकता है।
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