रविवार, 11 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं रहा -- सिब्बल
दिल्ली । एक इंटरव्यू और हालिया मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि वे बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाकर थक चुके हैं और अब उन्हें वहां से किसी राहत की ज्यादा उम्मीद नहीं है। उन्होंने मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से नाम हटाने और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा था कि लोग मानते हैं कि संविधान को बचाने वाली एकमात्र संस्था सुप्रीम कोर्ट है, लेकिन अब उनका वहां से भरोसा उठ चुका है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया: कपिल सिब्बल की इस 'भरोसा न होने वाली' टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि उसका मुख्य मकसद न्यायिक प्रणाली में आम जनता का भरोसा बनाए रखना और जगाना है। अदालत ने जोर दिया कि अन्याय के खिलाफ न्यायपालिका की लड़ाई में नागरिकों और कानूनी बिरादरी का भरोसा बेहद जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय आया जब देश में विरोध प्रदर्शनों पर रोक, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियों तथा वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सिब्बल ने न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और मामलों के आवंटन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
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