जिले में लंपि वाइरस की आहट, प्रशासन अलर्ट
रतलाम। जिले के सीमावर्ती राजस्थान राज्य की सीमा बांसवाड़ा में बीमारी से 16 पशु ग्रसित है । रतलाम जिले से मंदसौर, उज्जैन, धार, झाबुआ जिलों की सीमा लगी है, जहां पर इस रोग से ग्रसित होने की पुष्टि नहीं हुई है। रतलाम जिले में कुल 38 पशु इस बीमारी से ग्रसित होने की संभावना है जिनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
निकल आती है बीमारी में गठाने
उप संचालक पशु चिकित्सक ने बताया कि वायरस एक वायरल बीमारी है, जो पायस वायरस द्वारा पशुओं में मच्छर, मक्खी, जुओं के काटने से तथा एक पशुओं से दूसरे पशु में फैलती है। इसकी शुरुआत में हल्का बुखार 2 से 3 दिन के लिए रहता है, इसके बाद पूरे शरीर की चमड़ी में गठानें निकल आती है। इस बीमारी के लक्षण गले, श्वास नली तक देखे जाते हैं। ज्यादा समय इंफेक्शन रहने से दुग्ध उत्पादकता में कमी हो जाती है। अधिकतर संक्रमित पशु 2 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं किंतु दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है। सुरक्षा एवं बचाव के संबंध में कहा गया है कि संक्रमित पशु को स्वस्थ्य पशु से तत्काल अलग कर देना चाहिए। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं के झुंड में शामिल नहीं करना चाहिए।
कैसे फैलता है लंपी वायरस
संक्रमित क्षेत्र में बीमारी फैलने वाले व्यक्ति की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु प्रशासन द्वारा नगर परिषद, ग्राम निकायों को निर्देशित किया गया है। संक्रमित क्षेत्र के बाजारों में पशु बिक्री, पशु प्रदर्शनी आदि पूर्णता प्रतिबंधित रहेगी। क्षेत्र के केंद्र बिंदु से 10 किलोमीटर की परिधि क्षेत्र में पशु बिक्री कार्य नहीं किया जाना चाहिए। पशु बांधने की जगह तथा आसपास साफ सफाई रखना अत्यंत आवश्यक है। पशु में संक्रमण की दशा में सबसे पहले पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग करके पशु चिकित्सक की उपस्थिति में एंटीपायरेटिक एंटी इन्फ्लेमेटी दवाई 5 दिन तक लगवाना चाहिए।
क्या इंसानो में फ़ैल सकतीं हे ये बिमारी
सर गंगाराम हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के डिपार्टमेंट ऑफ प्रिवेंशन हेल्थ एंड वेलनेस की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत कहती हैं कि लंपी स्किन डिजीज पशुओं में फैलने वाली बीमारी है. यह गाय, भैंस, बकरी और भेड़ में तेजी से फैल सकती है. अगर इंसानों की बात करें तो उनमें यह बीमारी फैलने का खतरा न के बराबर है. हालांकि पशुओं को छूने के बाद सभी लोगों को साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लेने चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि अपने पशुओं को इस संक्रमण से बचाया जा सके. इंसानों को भी सावधानी बरतनी चाहिए. पशुओं को समय पर वैक्सीन लगवाकर इस डिजीज का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
