कानून के जानकार ही अगर कानून ......???
पब्लिक के द्वारा न समझी में कानून तोडना आम बात हे , पर यहां तो कानून पड़ने वाले ही तोड़ रहे हे, जिले में चंद दिनों में दो ऐसी घटनाए हुई जिसकी वजह से आम जनमानस क्या सोचता होगा खास तोर पर कुछ बिगड़ैल युवा नए - नए राजनीती में आए हे उन पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा ये सोचनीय प्रश्न हे, जिस तरह से समाज में अपने- अपने संघटन बना कर शासन और प्रशासन पर दबाव बना कर कानून हाथ में लेकर कुछ युवा राजनीती में अपने आकाओ को खुश करके पद पाना चाहते हे खास तोर पर ऎसे लोगो को और बढ़ावा मिलेगा ऎसे में शेष जन समुदाय के अधिकारों का हनन होता हे।
ऐसी ही दो घटनाए आलोट और जावरा में घटी आलोट में जिस तरह से प्रशासन और विधायक के बीच खींचा तानी हुई और विधायक एव एक वकील पर प्रशासन द्वारा शासकीय कार्य में बाधा मानते हुवे FIR करवाई गई हे जिसमे समाचार लिखे जाने तक विधायक फरार थे वही कोर्ट द्वारा वकील की जमानत को खारिज किया गया हे, जिस तरह आलोट के वकीलों और अभिभाषक संघ ने वकीलों का साथ दिया वही प्रशासन ने उनके कार्य को शासकीय कार्य में बाधा मानते हुवे FIR करवाई अब कौन सही हे ये प्रश्न बनता हे।
वही जावरा में एक अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा लोक सेवक के कार्य में बाधा पहुचाने एव मृत्यु कारित करने की धमकी को लेकर एडवोकेट आईए मेव के विरुद्ध पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है, आवेदन के आधार पर पुलिस ने वकील के विरुद्ध आईपीसी की धारा 186 व 506 में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब अभिभाषक संघ और ज्यूडिशली में टकराओ की संभावना बन रही हे, अगर दोनों के बीच राजीनामा भी होता हे तो भी समाज मे क्या मेसेज जाएगा...? जवाबदारों को इस मसले पर तुरंत ही संज्ञान लेकर मसले का हल निकालना पड़ेगा नहीं तो इसका दूरगामी परिणाम होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
