ममता के साहस को सलाम.....
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मानवता और अदम्य साहस
की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी की आँखें नम हैं।
जानकारी के अनुसार यहाँ एक आंगनबाड़ी केंद्र में 'जय माता दी स्व-सहायता समूह' की अध्यक्ष कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की बाजी लगाकर 20 मासूम बच्चों को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया। बच्चों को बचाते-बचाते कंचन बाई खुद हजारों मधुमक्खियों के डंक का शिकार हो गईं और अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
तिरपाल बनी सुरक्षा कवच, खुद बनीं ढाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय
हुई जब आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर बच्चे खेल
रहे थे। अचानक पास के पेड़ से मधुमक्खियों
के झुंड ने बच्चों पर हमला कर दिया। नन्हे बच्चों को तड़पते देख कंचन बाई ने एक पल की भी देरी नहीं की। वे पास पड़ी दरी और तिरपाल लेकर बच्चों की ओर दौड़ीं। उन्होंने बच्चों को तिरपाल में लपेटकर सुरक्षित कमरों के भीतर पहुँचाया। इस दौरान हजारों मधुमक्खियां कंचन बाई के शरीर से चिपक गईं, लेकिन उन्होंने तब
तक हार नहीं मानी जब तक कि आखिरी
बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया।
अस्पताल में तोड़ा दम, हर आँख नम
हमले के बाद कंचन बाई को गंभीर हालत
में जिला चिकित्सालय ले जाया गया,
जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही पूरे रानपुर
गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों का कहना है कि कंचन बाई ने जो किया वह कोई साधारण साहस नहीं, बल्कि सर्वोच्च बलिदान है। कंचन बाई ने बच्चों को बचाने के लिए खुद की जान को दांव पर लगा दिया। अगर वह हिम्मत न दिखातीं,
तो आज कई घरों के चिराग बुझ जाते।कंचन बाई अपने परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य थीं। उनके पति शिवलाल पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित हैं और घर में तीन छोटे बच्चे हैं।