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गुरुवार, 1 फ़रवरी 2024

फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का लेनदेन करने वाले धराये

                                    फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का लेनदेन करने वाले धराये 

                                         

रतलाम फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का लेनदेन करने वाले तीन लोगो को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिनसे पूछताछ की जा रही है। तीनों मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं। इनके कब्जे से पुलिस ने चेक बुक सिम, मोबाइल मिले हैं। पूरे मामले में सात बैंक अधिकारियों की चुप्पी पर भी शंका की सुई घूम रही है। इस मामले में पुलिस बड़े घोटाले बाजों तक पहुंचाने की फिराक में है।

पुलिस अधीक्षक ने गुरुवार शाम को पत्रकारों से चर्चा के दौरान खुलासा करते हुए बताया कि तीन दिन पूर्व सूरज पिता रामकिशोर चौरे नामक एक फरियादी ने पुलिस को बताया कि वह मूलरूप से इन्दौर का रहने वाला है और वर्तमान में रतलाम में रहकर फास्ट फूड का ठेला लगाता है। सूरज की मुलाकात तुलसीराम नामक एक व्यक्ति से हुई थी ,जिसने सूरज को हर महीने पन्द्रह हजार रुपए देने का लालच दिया और पन्द्रह हजार रुपए के बदले सूरज के नाम से बैक खाता खुलवाया। इसके साथ ही सूरज के नाम से एक कंपनी भी रजिस्टर्ड करवाई गई और इस कंपनी के नाम से भी बैक खाता खोला गया।

उक्त व्यक्ति ने बैक खाते खुलवाने के बाद बैक की चैक बुक, खाते की सारी डिटेल और खाते से जुडी मोबाइल सिम इत्यादि तुलसीराम ने अपने पास रख ली। इसके बाद सूरज को अचानक से पता चला कि उसके बैक खातों से पिछले मात्र एक डेढ माह में करोडों का लेन देन हो चुका है। यह जानकारी मिलने पर सूरज को शंका हुई कि मामले में कुछ ना कुछ गडबड है। सूरज ने बैक में जाकर अपने खाते को फ्रीज करवाया और इस बात की शिकायत पुलिस को की। सूरज की शिकायत पर औद्योगिक क्षेत्र पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच प्रारंभ की। जांच में आगे बढने पर पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाली जानकारियां आई,जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला बेहद बडे घोटाले का एक छोटा हिस्सा है।

बैक खातों के फ्राड को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने औद्योगिक क्षेत्र पुलिस और सायबर सेल की संयुक्त टीम गठित कर उन्हे मामले की जांच के निर्देश दिए। पुलिस को पता चला कि गरीब लोगों को हर महीने कमाई का लालच देकर उनके नाम के बैक खाते खुलवाने और कंपनिया बनाने के इस काम में आरोपी तुलसीराम के अलावा दो अन्य लोग योगेश शर्मा और सूर्यप्रकाश त्रिपाठी भी शामिल है। इन तीनों ने अपना वर्तमान पता शक्ति नगर रतलाम को बता रखा है, लेकिन असल में ये राजस्थान के भीलवाडा और अजमेर इलाको के रहने वाले है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

 


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